शिमला, 19 अगस्त। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट कहा कि हिमकेयर योजना प्रदेश के गरीब और आम आदमी की मदद के लिए शुरू की गई थी, लेकिन पिछली भाजपा सरकार ने इसे अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने की योजना बना दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अब तक इस योजना पर 550 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और किसी भी मरीज का इलाज हिमकेयर योजना की वजह से नहीं रुकेगा।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य विनोद कुमार ने सवाल उठाया कि हिमकेयर योजना बंद कर दी गई है और मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। इस पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने जवाब दिया कि योजना अभी भी चल रही है, लेकिन 364.20 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी बाकी है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस के लिए 25 निजी स्वास्थ्य संस्थानों को पंजीकृत किया गया है। हालांकि, निजी अस्पतालों में अनियमितताओं के कारण वहां हिमकेयर की सुविधा कुछ समय के लिए बंद की गई थी।
भाजपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि आईजीएमसी, टांडा, नेरचौक, चंबा मेडिकल कॉलेज और एम्स बिलासपुर में हिमकेयर कार्डधारकों को मुफ्त इलाज नहीं मिल रहा। इस पर विपक्ष ने मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बाहर चले गए।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष की गैरमौजूदगी में कहा कि भाजपा केवल सनसनी फैलाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के समय हिमकेयर का फायदा निजी अस्पतालों और दवा दुकानों ने उठाया। यहां तक कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन न लगाकर निजी अस्पतालों में एमआरआई करवाई जाती रही और हिमकेयर में उसके बिल बनते रहे।
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। चमियाणा अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है और जल्द ही टांडा मेडिकल कॉलेज में भी यह सुविधा उपलब्ध होगी। आईजीएमसी, चमियाणा और टांडा अस्पतालों में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड लैब स्थापित की जा रही हैं और इसके लिए 75 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि हिमकेयर योजना के तहत किसी भी मरीज का इलाज बंद नहीं होगा और सरकार इसमें सुधार करके इसे और प्रभावी बनाएगी।