शिमला, 31 जुलाई। हिमाचल प्रदेश में ओरेंज अलर्ट के बीच मॉनसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बीती रात राज्य के कई हिस्सों में व्यापक बारिश हुई और शुक्रवार सुबह भी मौसम खराब बना रहा। सबसे अधिक बारिश चंबा और कांगड़ा क्षेत्र में दर्ज की गई। लगातार वर्षा के कारण किन्नौर के प्रवेश द्वार चौरा के पास नेशनल हाईवे-05 पर सुबह भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर सड़क पर गिरने से कुछ समय के लिए किन्नौर का देश के बाकी हिस्सों से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया। बाद में मशीनों की मदद से मलबा हटाकर मार्ग बहाल कर दिया गया और यातायात फिर शुरू हो गया।
मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में धर्मशाला में 147.1 मिमी, जोत में 76.8 मिमी, चंबा जिले के भटियात-चुवाड़ी में 75.3 मिमी, मंडी के गोहर में 60.0 मिमी, किन्नौर के निचार में 52.0 मिमी, शिमला जिले के सराहन में 39.0 मिमी, पालमपुर में 38.0 मिमी, कुल्लू के कोठी में 34.8 मिमी, हमीरपुर के भरेड़ी में 27.8 मिमी और कांगड़ा में 21.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग ने बताया कि चंबा, कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश का दौर जारी है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भूस्खलन और बारिश के कारण पूरे प्रदेश में 130 सड़कें बंद हैं। इनमें मंडी में 48, कुल्लू में 47, सिरमौर और चंबा में 9-9, कांगड़ा में 8 तथा शिमला में 7 सड़कें शामिल हैं। प्रशासन प्रभावित मार्गों को खोलने में जुटा है और लोगों से यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की गई है।
कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र में भी लगातार बारिश का असर दिख रहा है। पलचान पुल के पास भूस्खलन हुआ, जबकि सोलंग घाटी और फर्स्ट स्नो गैलरी की ओर जाने वाले मार्ग पर कई स्थानों पर मलबा आने से आवाजाही प्रभावित हुई। सीमा सड़क संगठन ने मशीनें लगाकर सड़क साफ करने का काम शुरू किया। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहने और केवल जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने 31 जुलाई से 6 अगस्त तक पूरे प्रदेश में मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार 31 जुलाई, 1 अगस्त, 2 अगस्त, 3 अगस्त और 4 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। 5 और 6 अगस्त को भी कई स्थानों पर भारी वर्षा होने का अलर्ट जारी किया गया है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़, चट्टानें गिरने और निचले इलाकों में जलभराव की घटनाएं बढ़ सकती हैं। लोगों और पर्यटकों से मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।