कांगड़ा जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बांदोल को ‘लैंड मैनेजर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। स्कूल ने पौधारोपण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दिया। चंबा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय होबार को जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए ‘वाटर-वाइज अवार्ड’ मिला। स्कूल ने वर्षा जल संचयन और पानी के पुनः उपयोग जैसी पहलें अपनाईं। वहीं चंबा के ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खरगाट को ‘वेस्ट वॉरियर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। स्कूल ने कचरे के पृथक्करण, कम्पोस्टिंग और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर एक मिसाल पेश की।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के “फेफड़ों” की तरह है और यहां के जंगल तथा नदियां करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अधिक पेड़ लगाने, पानी बचाने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील की।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के पर्यावरण शिक्षा इकाई के कार्यक्रम प्रबंधक नीरज कुमार के अनुसार वर्ष 2025-26 के राष्ट्रीय ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम ऑडिट में हिमाचल प्रदेश के 321 स्कूलों ने भाग लिया था। इनमें से 35 स्कूलों को ग्रीन रेटिंग प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि सम्मानित स्कूल इस बात का उदाहरण हैं कि पर्यावरण शिक्षा को व्यवहार में उतारकर किस तरह ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
ग्रीन स्कूल्स प्रोग्राम के तहत स्कूलों को अपनी पर्यावरणीय कार्यप्रणाली का आकलन करने और उसे बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कार्यक्रम के तहत स्कूलों में ऊर्जा और पानी की बचत, वर्षा जल संचयन, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, जैव विविधता संरक्षण, कचरा पृथक्करण और रीसाइक्लिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। साथ ही विद्यार्थियों को व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाया जाता है।
सीएसई के अनुसार एक ‘ग्रीन स्कूल’ वह माना जाता है जो प्राकृतिक रोशनी का अधिक उपयोग करे, सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पैदल चलने जैसी टिकाऊ परिवहन व्यवस्थाओं को बढ़ावा दे, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करे, स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाकर हरित क्षेत्र बढ़ाए, वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल उपचार की व्यवस्था करे तथा अधिकांश कचरे का पुनर्चक्रण और जैविक कचरे का कम्पोस्ट तैयार करे।