शिमला, 06 जून। हिमाचल प्रदेश में शनिवार को पंचायती राज संस्थाओं के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में शिमला जिला परिषद के नवनिर्वाचित 25 सदस्यों को उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बचत भवन के सभागार में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। हालांकि यह समारोह उस समय विवादों में घिर गया जब भाजपा नेताओं ने कार्यक्रम की व्यवस्था को लेकर उपायुक्त शिमला के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका घेराव कर दिया।
जिला प्रशासन की ओर से आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जिला परिषद के सभी 25 वार्डों से निर्वाचित सदस्य मौजूद रहे। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने सभी सदस्यों को शपथ दिलाई और उन्हें जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया।
शपथ लेने वालों में त्यावल ज्यूरी वार्ड से अनुराधा, झाकड़ी से ममता, नरैण से रॉनी, बगलती से रानु देवी, सीमा रणटाड़ी से सुरेंद्र रेटका, क्वार से मनजीत सिंह, खशधार से धर्मेंद्र सिंह, भलूण से कल्पना देवी, टिक्कर से भरत सिंह कलांटा, सरस्वती नगर से नेहा मेहता, बढ़ाल से मीनाक्षी, कलबोग से रेखा चौहान और चडोली से मन्नत तेगवान शामिल रहे। इसके अलावा चंदलोग-नेरूवा से भोपेंद्र, गोरली-मड़ावग से अतुल शर्मा, घोड़ना से सुरेंद्र कुमार, टियाली से नेहा जगटा, क्यार से आशा कंवर, चमियाना से खुश विक्रम सेन, बल्देंया से ओम प्रकाश, बढ़ई से प्रियंका तनवर, हलोग-धामी से अनीता देवी, खटनोल से प्रभा उर्फ शिवानी, कुमारसैन से तारा देवी और भुटटी से संदीप ने भी शपथ ली।
हालांकि शपथ ग्रहण के दौरान विवाद तब शुरू हुआ जब प्रशासन की ओर से सभागार में केवल निर्वाचित सदस्यों को रहने की अनुमति दी गई और अन्य लोगों को बाहर जाने के लिए कहा गया। इस फैसले का भाजपा नेताओं ने विरोध किया। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सदस्यों के परिजनों, समर्थकों और मीडिया प्रतिनिधियों को भी हॉल से बाहर कर दिया गया, जिससे नाराज होकर उन्होंने उपायुक्त कार्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि वह वर्ष 2000 से ऐसे शपथ ग्रहण समारोहों में शामिल होते रहे हैं, लेकिन पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के परिजनों और समर्थकों को समारोह से बाहर रखा गया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जिला परिषद में भाजपा की संभावित जीत का डर है और इसी वजह से इस प्रकार की व्यवस्था की गई।
पूर्व शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, इसलिए शपथ ग्रहण समारोह को सीमित करने का प्रयास किया गया। भाजपा जिला अध्यक्ष केशव चौहान ने भी प्रशासन के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि निर्वाचित सदस्यों के परिवारों और समर्थकों को समारोह में शामिल होने का अधिकार है।