शिमला, 28 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश के शहरों में बढ़ते कचरे की समस्या से निपटने के लिए अगले 20 से 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। शहरी विकास एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कचरे के निस्तारण के लिए जमीन की सीमित उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, कचरे के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने पहले कुछ चयनित क्षेत्रों में पायलट परियोजनाएं शुरू करने का सुझाव दिया, जिससे परिणामों के आधार पर इनका विस्तार किया जा सके।
विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को शहरी विकास विभाग और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के संयुक्त तत्वावधान में परियोजना ‘सर्कुलर भारत’ के तहत आयोजित राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। एक दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाना है। इसके साथ ही कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
गीले और सूखे कचरे को अलग रखने पर ध्यान
मंत्री ने कहा कि शहरों में कचरे की समस्या के समाधान के लिए जनभागीदारी, जागरूकता और कचरे को उसके स्रोत पर अलग करना आवश्यक है। घरों और समुदायों में गीले तथा सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने की बात भी कही। प्लास्टिक कचरे के बेहतर उपयोग और पुनर्चक्रण की संभावनाओं पर काम करने की जरूरत बताई।
निदेशक शहरी विकास नीरज कुमार ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य शहरी निकायों की संस्थागत क्षमता मजबूत करना और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है। इसके तहत कचरे का संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति तथा पुनर्चक्रण पर काम किया जाएगा। मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) के प्रभावी संचालन पर भी ध्यान रहेगा। परियोजना के तहत तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण कार्यशालाओं और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय के माध्यम से मौजूदा कचरा प्रबंधन ढांचे का बेहतर उपयोग करने की योजना है।