शिमला, 18 मई। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देशों के तहत अब सभी न्यायाधीश कार-पूलिंग व्यवस्था अपनाएंगे, जबकि रजिस्ट्री से जुड़े कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की ओर से यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला ऊर्जा संरक्षण, ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों ने आपसी सहमति से कार-पूलिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके तहत न्यायाधीश एक ही वाहन में यात्रा करेंगे, जिससे अनावश्यक ईंधन खर्च को कम किया जा सके। अदालत का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मितव्ययता को भी बढ़ावा मिलेगा।
हाईकोर्ट प्रशासन ने यह भी कहा है कि यह कदम भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और भारत का सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जारी परिपत्र के अनुरूप उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत हाईकोर्ट रजिस्ट्री की प्रत्येक शाखा और सेक्शन में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बाकी कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहें, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।
वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ड्यूटी के दौरान फोन पर उपलब्ध रहें। साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत कार्यालय पहुंचना होगा।